Saturday, 10 December 2011

डेटिंग आखिर क्यों?

डेटिंग इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इससे आपको वचनबद्धता के सम्बन्ध में बंधने से पहले अपने भावी साथी को बेहतर जानने में मदद मिलती है। ज़्यादा डेट्स व्यक्ति के संयम की परीक्षा ले सकती हैं और तब आपके सामने आता है आपके साथी का असली रूप जिसे देखकर आपको यह तय करने में मदद मिलती है कि इसके साथ लम्बे समय का सम्बन्ध बनाया जाए या नहीं?




* लोग अपनी पहली डेट में सबसे अच्छा व्यवहार करते हैं और बाद की डेट्स यह जानने के लिए महत्वपूर्ण होती हैं कि व्यक्ति की असलियत कैसी है?
* डेटिंग आपको अपने साथी को बेहतर समझने में और यह जानने में मदद कर सकती है कि क्या वह आपके लिए बिल्कुल उपयुक्त है या नहीं ?
* बिना पहले से जाने-समझे सीधे किसी से लम्बी अवधि का सम्बन्ध कायम कर लेना मूर्खतापूर्ण कदम है, क्योंकि इससे बाद में दिल भी टूटते हैं और जब असलियत सामने आती है तब दूसरी परेशानियां भी खड़ी होती हैं ।
* डेटिंग मजबूत सम्बन्ध बनाने में मदद करती है।



डेटिंग की मदद से आप अपने साथी को समझ सकते हैं।

डेटिंग टिप्स

डेट पर जाना सभी को बहुत भाता है लेकिन प्राय: देखा जाता है कि जिस लड़की के साथ डेट पर जाने के लिए आपने इतना लंबा इंतजार किया और जब वह आपके साथ डेट पर जाने के लिए हामी भर देती है तो आपकी एक छोटी सी नासमझी या गलती के कारण उसके सामने अपनी छवि खराब हो जाती है. हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि अगली बार मिलने की बात तो जाने ही दीजिए पहली मुलाकात में समय गुजारना तक भारी पड़ जाता है. फिर चाहे आप कितने ही आकर्षक और लोकप्रिय क्यों ना हों मात्र एक गलती आपकी सभी खूबियों को खामियों में बदल देती है.




अगर आप निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान डालेंगे तो आपको यह अहसास होगा कि जिन गलतियों का जिक्र हम कर रहे हैं, जाने-अनजाने अधिकांश युवक इन्हीं गलतियों को अंजाम दे देते हैं. पहली बार आप किसी से मिल रहे हैं और उसी दौरान अगर आप ऐसा कुछ कर बैठे जो आपके लव-इंट्रस्ट को किसी भी रूप में अच्छा ना लगे तो निश्चित रूप से यह आपके संबंध के भविष्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है. गलतियां सभी से होती हैं लेकिन एक समझदार और परिपक्व व्यक्ति वही है जो उन गलतियों को स्वीकार करने के साथ उनका समाधान ढूंढ़ने का भी प्रयत्न करता है:


* देर से पहुंचना: जरा सोचिए जिस लड़की के साथ डेट पर जाने के लिए आपने इतना इंतजार किया और जब जाने का मौका मिला तो घर से लेट निकलने के कारण आप ही समय पर नहीं पहुंचे. इससे आपकी छवि कितनी खराब होगी और आपकी डेट कितनी आग-बबूला होगी आप शायद यह कल्पना भी नहीं कर सकते. एक लड़की को अपने ब्वॉयफ्रेंड का इंतजार करना बिलकुल पसंद नहीं आता. वह हमेशा यही चाहती है कि ब्वॉयफ्रेंड उससे पहले पहुंचे. इतना ही नहीं लेट पहुंचकर अगर आप झूठे बहाने बनाएंगे तो यह उसे बिलकुल पसंद नहीं आएगा इसके विपरीत अगली बार मिलने की संभावनाओं पर पानी फिर जाएगा.

समाधान: घर से जल्दी निकलने का प्रयत्न करें. इससे आपके पास समय पर पहुंचने के लिए काफी समय होगा. अगर सड़क पर जाम लग जाए या गाड़ी खराब हो जाए तो भी आप समय पर पहुंच सकते हैं. लेकिन अगर फिर भी आप लेट हो जाते हैं तो अपनी डेट को पहले ही फोन कर अपने लेट आने की सूचना दे दें. झूठ बोलने से अच्छा है उसे देर से आने का सही कारण बताएं.


* होटल स्टाफ के साथ उग्र बर्ताव: युवकों का यह स्वभाव होता है कि जब भी वह किसी लड़की के साथ होते हैं तो उसे इम्प्रेस करने के लिए और खुद को ऊपर दिखाने के लिए अन्य लोगों के साथ गलत व्यवहार करते हैं. विशेषकर जिस होटल में वो खाना खाने बैठते हैं वहां के स्टाफ के साथ तो वह बहुत बुरा बर्ताव करते हैं. लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि जिस लड़की को इम्प्रेस करने के लिए उन्होंने यह किया था उन्हें उनका अहंकारी और क्रोधी स्वभाव बिलकुल सहन नहीं होता और वह उनसे दूर रहने लगती है.

समाधान: आपको एक बात समझनी चाहिए कि अगर आप लोगों को सम्मान नहीं देंगे तो आपको साथ भी कोई सम्मानपूर्वक व्यवहार नहीं करेगा. इसीलिए होटल स्टाफ या फिर कोई अन्य व्यक्ति आपको सभी के साथ अच्छा और विनम्र व्यवहार करना चाहिए.


* सारी बातें स्वयं करना: कई पुरुषों को अपनी कहने और दूसरों की ना सुनने की आदत होती है. जब भी वह किसी से बात करते हैं तो उसके पूछे बिना ही अपने विषय में सब कुछ बता देते हैं. इतना ही नहीं अपने शौक, पसंद-नापसंद सब कुछ वे पहली मुलाकात में ही कह डालते हैं. लेकिन अपने विषय में बताते समय वह यह नहीं सोचते कि उनकी डेट को इन सब बातों में दिलचस्पी है भी या नहीं. वे लड़की को तो कुछ कहने नहीं देते खुद ही कहते रह जाते हैं.

समाधान: हो सकता है कि आप कॉलेज के सबसे होनहार और लोकप्रिय विद्यार्थी रहे हों. खेल-कूद और शरारतों में अव्वल रहते हों. लेकिन आपको यह भी समझना होगा कि जरूरत से ज्यादा अपनी तारीफ करना भी नुकसानदेह हो सकता है. आप उनसे भी उनके विषय में जानने का प्रयत्न करें. उन्हें क्या पसंद है, उनके शौक क्या-क्या हैं आदि कुछ ऐसी बाते हैं जो आप दोनों को एक-दूसरे के नजदीक लाती हैं.


* खुद को कूल डूड ना दिखाएं: अगर आप अकसर लो-वेस्ट जींस या ढीली-ढाली टी-शर्ट पहनते हैं तो डेट पर जाने से पहले अपने ड्रेसिंग सेंस को थोड़ा सुधार लें. आपकी डेट को कभी भी ऐसे कपड़े पसंद नहीं आएंगे.

समाधान: डेट पर जाते समय आप एक साफ और इस्त्री की हुई शर्ट पहन कर जाएं. आपके कपड़ेही यह दर्शाते हैं कि आप अपनी डेट के लिए कितने गंभीर हैं. अगर आप बिना सोचे-समझे कपड़े पहनकर जाएंगे तो यह आपकी डेट पर नकारात्मक असर डाल सकता है.


* पूर्व प्रेमिका के विषय में बात करना: अपने एक्स के बारे में बात कर आप अपने संबंध को बनने से पहले ही तोड़ने का काम कर रहे हैं. आपकी डेट को यही लगेगा कि आप अपनी पूर्व प्रेमिका को अभी तक भुला नहीं पाए हैं.

समाधान: वार्तालाप के दौरान कहीं भी और कभी भी अपने एक्स का जिक्र ना करें. एक नई शुरूआत के लिए पुरानी चीजों को भूलना ही पड़ता है.


* उचित दूरी बनाए रखें: अपनी प्रेमिका से उचित दूरी पर बैठें और हर बात पर उन्हें हाथ ना लगाएं. नहीं तो आपकी डेट को बस यही लगेगा कि आप उनकी ओर केवल शारीरिक आकर्षण ही रखते हैं.

समाधान: लड़कियों को बेहद नम्र और डिसेंट लड़के पसंद आते हैं. एक सम्मानजनक दूरी जरूर बनाए रखें.

Thursday, 1 December 2011

पहली मुलाकात

हेलो दोस्तो! बहुत सारे युवक इस बात का ही रोना रोते रहते हैं कि उनकी किसी लड़की से दोस्ती नहीं होती है। कोई उपाय बताएँ कि कैसे वह लड़कियों से दोस्ती करें, कैसे उन्हें गर्लफ्रेंड बनाएँ। पर जब किसी लड़की से दोस्ती हो जाती है तब फिर यह विकट समस्या सामने आती है कि एकांत में वह उनसे कैसे और क्या संवाद बनाएँ।



युवती दोस्त के साथ कई लोगों के बीच बातचीत करना, हँसी-मजाक करना और थोड़ा रूमानियत का अहसास करना एक बात है लेकिन उसी के साथ एकांत में संवाद बनाना बिल्कुल अलग।

किसी लड़की द्वारा अपने लड़के दोस्त का यह प्रस्ताव मान लेना ही काफी नहीं है कि वह उसके साथ डेट पर जाने को तैयार है। यूँ तो किसी भी रिश्ते की यह पहली बड़ी सफलता मानी जाएगी पर इसे बहुत ही संकट का समय भी माना जाएगा। अगर युवती किन्हीं कारणों से अपने मित्र से प्रभावित नहीं हुई तो इस रिश्ते को यहीं पर पूर्ण विराम लग सकता है। पहली डेटिंग ही अंतिम डेटिंग बन सकती है।

लड़कों का डरना और दुविधा में रहना भी स्वाभाविक है। यूँ तो लड़के और लड़कियाँ मनुष्य ही हैं पर अलग माहौल में परवरिश के कारण दोनों के सोचने-समझने का तरीका भिन्न होता है। इसी वजह से दोनों ही कई बार नए माहौल में सशंकित से रहते हैं। अधिकतर मामले में पहली डेट पर पूरी जिम्मेदारी लड़कों की हो जाती है कि वह कैसे उस शाम या समय को खुशगवार बनाए रखें।

सबसे पहला संकट यह आता है कि आखिर बात कहाँ से शुरू की जाए। ऐसे वाक्य से संवाद शुरू करना चाहिए जो ज्यादा भारी-भरकम न हों और जवाब देने वाले को भी कोई जोखिम महसूस न हो। जैसे, 'आज का दिन कैसा बीता?' बहुत ही उचित प्रश्न है उस मौके के लिए। इस बात पर वह आसानी से बात शुरू कर सकती है और बहुत कुछ बताने को हो भी सकता है। माहौल सहज करने के लिए ऐसा प्रश्न करना और फिर धैर्य से पूरा जवाब सुनने के बाद थोड़ा अपना अनुभव भी बताना अनुकूल हो सकता है।

अब आप थोड़ा निजीपन की ओर बढ़ सकते हैं। संभ्रांत और सौम्य आवाज और भाषा में अपनी डेट की पोशाक के चयन की सराहना कर सकते हैं। रंगों की तारीफ करते हुए आप हौले से बता सकते हैं कि यह उस पर फब रहा है। उनके पूरे गेटअप और केश सज्जा की भी प्रशंसा कर सकते हैं।


हो सकता है उन्होंने ऐसी जींस और टॉप पहनी हो जो आपकी निगाह में उतना अच्छा न लग रहा हो फिर भी आपको उसकी तारीफ ही करनी चाहिए। आपकी यह प्रशंसा उन्हें आश्वस्त और सहज कर देगी। यह पूरी बातचीत इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इस पहली डेट के लिए उसने अतिरिक्त कोशिश की है।

सजने-संवरने में समय लगाया है। वैसे तो आपने भी तैयार होने में मेहनत की है और आपको उसकी दाद भी जरूर मिलेगी। कई बार लड़कियाँ ऐसी बातों में पहल करने से कतराती हैं लेकिन सहज और सही माहौल मिलने पर बहुत ही आसानी से ऐसी बातों में हिस्सा ले सकती हैं।

खाने-पीने के बीच ही उसकी पसंद के खाने पर जानते हुए बोलना चाहिए, 'सच यह बहुत ही प्यारा समय है मेरे लिए, इतना खूबसूरत लम्हा बीतेगा, इतना अच्छा लगेगा मिलकर बैठने पर यह मैंने नहीं सोचा था।' ऐसी बातों से आपकी 'डेट' बहुत खुश होगी। और अब आप किसी अन्य विषय पर बातचीत शुरू कर सकते हैं। यहाँ लड़कों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अमूमन लड़के, लड़कियों को कम अक्लमंद समझते हैं पर यह विचार बहुत ही खतरनाक है, इसे भाँपते ही आपकी 'डेट' आपसे दूर हो जाएगी।

कई लड़कियाँ इतनी हाजिरजवाब और जहीन होती हैं कि आपकी पुरुषवादी सोच को जानते ही आपको अलविदा कह देंगी और आपका मजाक भी उड़ाएँगी। इसलिए संवाद बनाते समय अपनी डेट को भी अपने बराबर ही समझें। विषय पर बात करते समय यदि नया नजरिया सामने आता है तो उसे सराहें और बताएँ कि यह दृष्टिकोण बिल्कुल नया है।

अगर अहं को सामने रखकर आप असहज होने लगेंगे और तारीफ करने से मैं छोटा हो जाऊँगा, ऐसा समझेंगे तो यह मान लें कि रिश्ता हाथ से गया। तारीफ में हमेशा सच्चाई झलकनी चाहिए। बनावटीपन से काम नहीं बनता। आपकी डेट को भी सच और ढोंग का अहसास हो जाएगा।

इस पूरी बातचीत का आधार यह होना चाहिए कि आप दोनों ज्यादा सहज हों, अच्छा महसूस करें, एक दूसरे के बारे में थोड़ी निजी बातें भी जान पाएँ। इसे बिलकुल परीक्षा वाला समय नहीं बना देना चाहिए। बहुत ज्यादा निजी सवाल भी नहीं करना चाहिए। अगर आपने सावधानी के साथ यह पहली डेट पार कर ली तो निश्चित ही अगली कई डेट आपकी होंगी।

Monday, 28 November 2011

लड़कियाँ --केरियर और प्यार के बीच


बदलते समय के साथ-साथ शिक्षा और कॅरियर विकल्पों के प्रसार-प्रचार में भी महत्वपूर्ण विस्तार और सुधार देखा जा सकता है. अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें अपने से दूर रखना भी स्वीकार कर लेते हैं. यही वजह है कि आज छोटे-छोटे शहरों के बच्चे उज्जवल भविष्य के सपने संजोए बड़े शहरों में पढ़ने और काम करने आते हैं. लेकिन जिस परिवार और अभिभावकों के साथ उन्होंने अपना बचपन गुजारा है उनसे दूर रहना उनके लिए बहुत दुखदायी बन जाता है. नए महौल के साथ सामंजस्य बैठा पाना उनके लिए कठिन हो जाता है.


फिल्मों में भी अकसर आपने यह देखा होगा कि जब भी कोई बच्चा अपने अभिभावकों से दूर रहने या पढ़ने जाता है तो उसे अपने घर की बहुत याद सताती है. कुछ दिनों तक वह ना तो ठीक से खा पाता है ना ही दोस्तों से घुल-मिल पाता है. इतना ही नहीं अगर घर लौटने के उसके सारे प्रयास विफल हो जाएं तो वह निराश और अवसादग्रस्त हो जाता है.


वर्तमान परिदृश्य के मद्देनजर हो सकता है बेपरवाह स्वभाव वाले युवकों की व्यावहारिक मानसिकता को देखते हुए, जो परिवार को एक बंधन से अधिक कुछ नहीं समझते और इससे दूर रहकर ही अपनी स्वतंत्रता का वास्तविक आनंद उठाते हैं, आपको परिवार से दूर रहकर उनका परेशान और निराश होना मात्र एक फिल्मी कहानी लगती हो, लेकिन एक नए अध्ययन ने यह प्रमाणित किया है कि वे लड़के जो परिवार से दूर रहते हैं उन्हें भावनात्मक समझी जाने वाली लड़कियों की अपेक्षा कहीं ज्यादा अपने परिवार की याद सताती है. विशेषकर मां के बिना रहना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है. वहीं दूसरी ओर वे युवतियां जो बाहर पढ़ने जाती हैं वह नई-नई मिली आजादी का पूरा फायदा उठाती हैं. अपनी मर्जी के अनुसार जीवन जीती हैं और दोस्तों के साथ घूमती-फिरती है.


ब्रिटेन की नेशनल एक्सप्रेस द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह प्रमाणित हुआ है कि घर से दूर रहने वाले लड़के अपनी मां और परिवार को लड़कियों की अपेक्षा कहीं ज्यादा याद करते हैं. अध्ययन में शामिल एक-तिहाई लड़कों का कहना है कि वह दूर रहकर अपनी मां के हाथ का बना खाना और उनका सानिध्य बहुत याद करते हैं. वह सिर्फ अपनी मां के साथ ही रहना चाहते हैं लेकिन लड़कियां जैसे ही नए महौल में खुद को ढाल लेती हैं वह वापस घर जाना नहीं चाहतीं.


इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता कार्ली ऑडोनल का कहना है कि होस्टल में रहना सभी युवाओं को भाता है लेकिन फिर भी उन्हें घर में मौजूद सुख-सुविधाओं और पारिवारिक सदस्यों की बहुत याद आती है.


ब्रिटेन में हुए इस अध्ययन को अगर थोड़ा और विस्तारित किया जाए तो युवावस्था से गुजर रहे लड़कों और लड़कियों की मानसिकता और प्राथमिकताओं के बीच के मौलिक अंतर का आंकलन भी आसानी से किया जा सकता है.


युवावस्था आयु का सबसे कोमल पड़ाव होता है. इस आयुवर्ग के बच्चे गलत और सही में भेद नहीं कर पाते और कहीं जल्दी अपने मार्ग से भटक जाते हैं. भारतीय परिदृश्य में अकसर आपने देखा होगा कि युवकों को तो फिर भी कुछ हद तक अपने इच्छानुसार आने-जाने की स्वतंत्रता मिल जाती है लेकिन परिवार चाहे कितना ही आधुनिक और खुले विचारों वाला क्यों ना हो, बेटियों को ज्यादा स्वतंत्रता देने से बचता ही है. युवकों की अपेक्षा युवतियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं.


एक निर्धारित आयु तक पहुंचने के बाद युवतियां अपने सपनों के राजकुमार के विषय में सोचने लगती हैं. उनकी आंखों में साथी के साथ एक सुखद भविष्य से जुड़े सपने घर करने लगते हैं. किसी फिल्म के नायक के साथ वह अपने राजकुमार की तुलना करने लगती हैं. उनका ड्रीम ब्वॉय कैसा होगा, क्या करता होगा, वह बस इन्हीं ख्यालों में खोई रहती हैं. ऐसे में अगर उन्हें परिवार और घर के बंधनों से बाहर रहने का अवसर मिले तो वह इस ओर ज्यादा आकर्षित होती हैं. परिवार के साथ रहते हुए जहां उन्हें अपनी स्वतंत्रता और आकांक्षाओं का दमन करना पड़ता था, वहीं अब वह स्वच्छंद जीवन व्यतीत कर सकती हैं. वह जब चाहे किसी से मिल सकती हैं और अपने सपनों के राजकुमार की तलाश कर सकती हैं. युवतियों के लिए जीवन में एक विशेष व्यक्ति का आगमन सबसे ज्यादा अहम होता है. अभिभावकों के साथ रहते हुए उन्हें मनचाही स्वतंत्रता नहीं मिल पाती इसीलिए परिवार से दूर रहने के दौरान वह उपलब्ध समय का पूरा आनंद उठाती हैं.


लेकिन युवकों पर घर में रहते हुए भी ज्यादा निगरानी नहीं रखी जाती इसलिए उनके लिए घर से दूर रहना बहुत भारी पड़ जाता है. उनके परिवार वाले कितने ही सख्त या कठोर क्यों ना हों वह उन्हें बहुत याद करते हैं. बाहर का खाना उन्हें बिलकुल पसंद नहीं आता. भले ही वह स्वयं को कितना ही लापरवाह दर्शाते हों लेकिन वे कभी भी अपनी मां के लाड़-प्यार से दूर नहीं रह सकते.


उल्लेखनीय है कि युवकों के लिए सपनों की राजकुमारी जैसी धारणा कुछ ज्यादा महत्व नहीं रखती. वह युवतियों के प्रति चाहे कितनी ही आकर्षित क्यों ना हों वह उन्हें सिर्फ गर्ल-फ्रेंड तक ही रखते हैं. परिपक्वता के पायदान पर पहुंचने के बाद ही उन्हें एक सुयोग्य और मनपसंद साथी की ख्वाहिश रहती है. लेकिन युवतियां प्रायः अल्प-कालिक संबंधों को प्रमुखता नहीं देतीं, वह अपने जीवन में आने वाले पहले पुरुष के साथ ही खुशहाल स्थायी जीवन बसर करना चाहती हैं. घर पर ज्यादा रोक-टोक और अपेक्षित स्वतंत्रता ना मिलने के कारण वह अपने साथी की तलाश नहीं कर पातीं, लेकिन जब उन्हें अकेले रहने का अवसर मिलता है तो वह अपनी दमित इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करती हैं.

प्यार की आहट

अक्सर कई बार होता है जब हम प्यार में होते हैं तो हमें पता नहीं चलता कि हम प्यार में हैं या नहीं. पर यह स्वाभाविक है कि अगर हम प्यार में हैं तो हमारे स्वभाव में कुछ फर्क आ जाता है. प्यार की कब, किसे, कैसे हो जाए- यह कहा नहीं जा सकता है. प्यार जब हो जाए तो चैन नहीं, ना हो तो बेचैनी, हो गया तो समझना मुश्किल, ना हो तो जीना मुश्किल.


ऐसे समय में प्यार को स्वीकार करने में भी हिचकिचाहट होती है और दिल में छुपाने में भी दर्द होता है. जिससे आपको प्यार है उससे आप बता भी नहीं सकते क्यूंकि फिर वही साला “डर” आपको सताएगा. प्यार की आहट को समझना कोई पहाड़ तोड़ने जैसी मुश्किल बात नहीं है. अगर आप प्यार में हैं और आपको जानना है कि प्यार की आहट होती कैसी है तो बस कुछ निम्न बातों पर गौर करें आपको जवाब मिल जाएगा:


एक दिन वह दिखाई न दे तो आपके दिल में अनेक अशुभ बातें आने लगें. दिल बुरी तरह से घबराने लगे.

* उसके बिना जिंदगी नीरस, फालतू, बकवास या आधी-अधूरी लगने लगे.

* किसी को फोन करते समय भूल से उसका मोबाइल नंबर डायल कर दें.

* मोबाइल की घंटी बजने या मिस कॉल आने पर ऐसा लगे उसने ही कॉल किया होगा.

* फोन पर घंटों बातें करने के बावजूद दिल न माने और बातें करने की इच्छा बनी रहे.

* रोमांटिक फिल्म में हीरो की जगह स्वयं को व हीरोइन की जगह उसके होने की कल्पना करने लगें.

* आपको भूख कम लगने लगे या खाने-पीने की सुध न रहे.

* पत्र-पत्रिकाओं में राजनीति, सामाजिक, करियर आदि की खबरों को छोड़कर फैशन, फिटनेस, ब्यूटी टिप्स, माई फस्ट लव, लव टिप्स आदि आप पढ़ना पसंद करने लगें.

* अखबार में पहले उसकी, फिर अपनी राशि देखें.

* आपको अपना डेट ऑफ बर्थ भले याद नहीं हो लेकिन उसके डेट ऑफ बर्थ से लेकर उसके पूरे फैमिली का बायोडाटा जबानी याद हो.

* गजलें और दर्द भरे गीत आप बड़े ध्यान से सुनने लगें. दूसरों को भी ऐसे गीत सुनने की सलाह देने लगें. गजल, शेरो-शायरी पर लंबा लेक्चर देने लगें. मानो उसके बारे में आपको बड़ा नॉलेज है.

* खुद में जादू की शक्ति संचार हो जाने की कल्पना करें. आपको ऐसा लगने लगे कि आप खुद गायब होकर कुछ ही पलों में कहीं से कहीं पहुँच सकते हैं.

* अपने कम्प्यूटर के पासवर्ड में उसके नाम का कोड रखें.

* जब भी वह उठकर कहीं जाए (बाथरूम भी) तो आपकी निगाहें उसका पीछा करती रहें.

* उसके पालतू कुत्ते, बिल्ली को भी चूमने का आपका मन करने लगे.

* आपके पास कैमरा होने पर उसकी ढेर सारी तस्वीरें उतारने का दिल करे.

* जब वह किसी लड़के/ लड़की के साथ बात करे तो आपको ईर्ष्या होने लगे. उस लड़के/ लड़की का गला घोंट देने की इच्छा होने लगे.

* उसकी बेतुकी या बच्चों जैसी हरकतें भी आपको अच्छी लगने लगे.
* आपमें दयालु और उदार के भाव आ जाएं. दूसरों की मदद करना आपको अच्छा लगने लगे.
* रोमांटिक गाने सुनकर आपका मन झूमने के लिए बेताब होने लगे.
* जब बात-बात पर मन खुशी से झूम उठे या मन रोने या रूठने का करने लगे.
* उनका मन में खयाल आते ही दिल में कुछ-कुछ होने लगे.
* आपका दिल हमेशा उससे मिलने के लिए बेचैन रहने लगे.
* उसके आने के पहले बहुत कुछ कहने को मन करे. उसके आने पर कुछ न कह पाएं. लब सिर्फ फड़फड़ाकर रह जाएं. कोई भी नई चीज खरीदने पर आपको लगने लगे पहले उसे दिखाऊं.
* उससे मिलने के लिए जाते वक्त दिल में अजीब-सी गुदगुदी होने लगे. मन प्रफुल्लित होकर शरीर हवा में उड़ने लगे.
* आप अपने बॉडी और फिगर पर अधिक ध्यान देने लगें. इसके लिए जिम आने लगें.
* बार-बार आप खुद को आईने के सामने खड़े पाएं. चेहरे पर हल्की-सी दाग से आपका मन विचलित होने लगे.
* आप अपने बालों का स्टाइल बदल लें. इसके लिए दोस्तों से सलाह लेने लगें.
* आपमें गजब का ड्रेस सेंस आ जाए. हर घंटे ड्रेस बदलने का मन होने लगे या हर रोज नई ड्रेस पहनने या नई ड्रेस खरीदने की इच्छा करने लगे.
* अपनी पसंद-नापसंद को भूल जाएं. उसकी पसंद-नापसंद को ज्यादा एहमियत देने लगें.
* उसकी हर अदा पर हो जाएं आप फिदा.
* आप अपनी लाइफ स्टाइल छोड़कर उसकी लाइफ स्टाइल अपनाने लगें.
* आप उससे दोस्तों के साथ मिलने की बजाय अकेले में मिलना चाहें. उससे अकेले में ही बात करने की इच्छा हो.
* आपका दिल उस पर मर मिटने को होने लगे.
* मैं की बजाय ‘हम’ शब्द का आप अधिकाधिक इस्तेमाल करने लगें.
* फुर्सत के क्षणों में आप रोमांटिक कल्पनाओं में डूब जाएं. आपको लगने लगे, वह आपकी बाहों में है या आप उसकी गोद में सिर रखकर लेटे हैं.
* उसके जैसा कोई खूबसूरत न लगे. सारी दुनिया की लड़कियां उसके सामने बदसूरत और फीकी लगने लगे.

Friday, 25 November 2011

फ्लर्टिंग के पांच तरीके

प्यार में एक दूसरे को आकर्षित करने के लिए फ्लर्टिंग करना सिर्फ चुहल नहीं है बल्कि
शोधकर्ताओं का कहना है कि फ्लर्टिंग रोमांटिक जिंदगी की दिशा तय करता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि किसी अजनबी को अपना बनाने

का तरकीब कोई जान ले तो रिश्तों की इस पहेली को सुलझाना आसान हो जाएगा।

कंसास यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी हॉल ने 5,100 लोगों पर शोध किया। उन्होंने इन लोगों से प्यार के दौरान की बातचीत और फ्लर्टिंग के बारे में पूछा। उन्होंने पाया कि किसी को अपना बनाने के लिए अपनाएं गए आकर्षण का तरीका यह जाहिर कर देता है कि प्रेम संबंध लंबे समय तक टिकेगा, क्योंकि इस दौरान आने वाली चुनौतियों से भी लोगों को कई सीख मिलती है और यह उन्हें प्रेम संबंधों में सफलता दिलाने में मददगार साबित होती है।

शोधकर्ताओं ने फ्लर्टिंग के पांच तरीके बताएं हैं जो इस प्रकार है।

पारंपरिक फ्लर्टिंग

फ्लर्टिंग का यह पुराना अंदाज माना जाता है इसमें रोमांश की पहल लड़के करते हैं। लड़कियां कुछ सक्रिय रहती हैं। इसमें लड़का लड़की को खुश करने के लिए अलग अलग तरीका अपनाता है। लड़की को अगर उसका फ्लर्टिंग का अंदाज पंसद आता है तो यह रिश्ता गहरा होता है।

पोलाइट फ्लर्टिंग

फ्लर्टिंग के इस तरीके में दोनों बहुत ही सौम्य और एक दूसरे के प्रति काफी संजीदा होते हैं। वे अपनी इच्छाओं को जल्दी जाहिर नहीं करते हैं। वे पार्टनर का चुनाव भी बहुत सोच समझकर करते हैं। पार्टनर में दिलचस्पी जाहिर करने में काफी समय लगा देते हैं।

फीजिकल फ्लर्टिंग

इसमें लोग अपने प्रेमी को अपने शारीरिक हाव भाव से यौन इच्छाओं का अहसास दिलाते हैं और जल्दी ही रिश्ता बनाने में कामयाब हो जाते हैं। इन लोगों के बीच बेहतर यौन संबंध होते हैं। इस संबंध के कारण ये भावनात्मक रूप से भी ज्यादा जुड़ जाते हैं।

ऑनेस्ट फ्लर्टिंग

इस तरह के लोगों को खुद पर भरोसा होता है। अपने पार्टनर के प्रति बहुत इमानदार होते हैं। वे भावनाओं को ज्यादा अहमियत देते हैं। करीब आने के लिए फ्लर्टिंग का सहारा जरूर लेते हैं लेकिन उनका मानना होता है कि रोमांटिक बातचीत रोमांस को आगे बढ़ाने का अच्छा तरीका है। ये लोग प्यार पाने में जल्दी कामयाब होते हैं।

प्लेफुल फ्लर्टिंग

आजकल ज्यादातर लोग प्लेफुल फ्लर्टिंग के ही पक्षधर हैं। ये अपने विचार दूसरों पर लागू करते हैं। ये रिश्ते बनाने में बहुत कम कामयाब होते हैं। क्योंकि ये जल्दी जल्दी पार्टनर बदलते हैं। रिश्ता बनाना इनका मकसद नहीं बल्कि एंजोय करना इनका ध्येय होता है।

लडको में क्या क्या खोजती हैं लड़कियाँ



प्यार, इश्क, मोहब्बत इन शब्दों को पढ़ते ही हमारा मन रुमानी भावों से भर जाता है। इश्क में पड़ते ही हमें हर चीज रंगीन नजर आने लगती है। प्यार के इस रंगीन एहसास को महसूस करने के लिए जरुरत है उस शख्स की, जिसे देख कर हम कह सके कि हां, यही है वह जिसका हमें इंतजार था।

लड़कों के लिए यह पहली नजर का प्यार हो सकता है लेकिन लड़कियों के लिए ऐसा नहीं है। हर लड़की के सपने में उसका राजकुमार रहता है, जिसे वह हकीकत में भी देखना पसंद करती है। अपने मन में बनाई इस रूपरेखा के ही अनुरूप ही वह अपने साथी का चयन करती है। आइए जानते हैं कि लड़कियां अपने साथी में क्या खूबियां चाहतीं हैं।

1 ईमानदारी और विश्वास: ईमानदारी और विश्वास हमेशा से ही एक अच्छे रिश्ते की रीढ़ है। हर लड़की चाहती है कि उसका साथी उस पर यकीन रखे और रिलेशन के प्रति ईमानदार रहे।

2 आदर का भाव: लड़कियां चाहती हैं कि उनका पार्टनर उनकी और उनके परिवार की इज्ज‍त करने वाला हो। साथ ही उसके मन में अन्य लड़कियों के प्रति भी आदर का भाव हो।


3 समानता: आज की लड़कियां चाहती हैं कि उनका पति उन्हें समानता की नजर से देखे। भा‍रत मुख्यत: पुरूष प्रधान देश है। बचपन से ही लड़कियों को अपने पति के अधीन रहने की सीख दी जाती है। बदलते परिवेश के साथ लड़कियों की सोच में भी परिवर्तन हुआ है। उनका मानना है कि पति-पत्नी जीवन रथ के दो पहिए क‍ी तरह हैं जिनका समान होना जरुरी है।

4 भावनाओं की कद्र : लड़कियां चाहती हैं कि उनका पार्टनर उनकी भावनाओं की कद्र करे और हमेशा एक मजबूत आधार की तरह उसका साथ दे।

5 सूरत नहीं सीरत : लड़कियां लड़कों की सूरत से ज्यादा सीरत पर मरती हैं इसलिए वे चाहतीं हैं कि उनका पार्टनर जैसा भी हो पर एक सज्जन पुरुष जरूर हो।