लड़कियों का दिल जीतना कोई आसान काम नहीं। लेकिन यदि ये काम समझदारी से न किया जाए तो लेने के देने पड़ सकते हैं। लड़कियों का दिल जीतने के लिए सबसे पहले माहौल को परखना जरूरी है। इतना ही नहीं लड़की को एकदम से प्यार का इजहार करने के बजाय लड़की से मित्रवत संबंध बनाने चाहिए। बातचीत में लड़कियों को मजा आता है, इसीलिए पहले उनसे बातचीत करना चाहिए। लड़कियों का दिल जीतने से पहले आपको बॉडी लैंग्वेज को जानना जरूरी है कि लड़की आपमें इंटरस्टेड है भी या नहीं। आइए जानें लड़कियों का दिल कैसे जीते।
* लड़कियों का दिल जीतने के लिए जरूरी है कि आप कुछ ऐसे काम करें जिससे लड़की आपसे इंप्रेस हुए बिना न रह सकें।
* लड़की को इंप्रेस करने के लिए या उसका दिल जीतने के लिए आपको उससे मुस्कुराकर बातचीत शुरू करनी चाहिए। इससे लड़की आपसे इंप्रेस होगी।
* जब भी बात करें हमेशा पॉजीटिव वे में बात करें, ताकि लड़कियां आपकी तरफ खिंची चली आएं।
* लड़कियों का दिल जीतने के लिए जरूरी है कि हमेशा गंभीर बाते ही न करें बल्कि कुछ हंसी-मजाक की बातें भी करें जिससे लड़कियों को आपकी कंपनी पसंद आए।
* लड़कियों से कोई भी बात करने से पहले माहौल को परखें और खासकर लड़की के मूड को यदि वह उदास है तो उसकी उदासी जान उसे हंसाने की कोशिश करें।
* लड़कियों को संकोची लड़के बिल्कुल पसंद नहीं आते। ऐसे में यदि आप लड़कियों से बात करते हुए हिचकिचाएंगे और डरेंगे तो लड़कियां भी आपसे बात करने से कतराएंगी।
* लड़कों को लड़कियों का दिल जीतने के लिए जरूरी है कि वह उनकी बॉडी लैंग्वेज को परखें। कि लड़कियां उन्हें किस रूप में ले रही हैं। लड़कियों के आपसे बात करते हुए हाव-भाव कैसे हैं। क्या वो आपसे खुश है। इत्यादि बातों का खास ध्यान रखें।
* किसी भी मामले में जल्दबाजी अच्छी नहीं और जब मामला हो दिल का ऐसे में तो फूंक-फूंक कर कदम उठाने चाहिए। जब भी आप किसी लड़की से बात करें तो बहुत उतावलापन न दिखाएं।
* लड़कियों को आमतौर पर बहुत बात करने की आदत होती है। ऐसे में वे चाहती हैं कि उनकी बात सुनने वाला कोई हो। जब भी आप किसी लड़की से बात करें तो उसे इंप्रेस करने के लिए जरूरी है कि आप कम बोलें और लड़की को ज्यादा बोलने का मौका दें।
* ये जरूरी नहीं कि आपको लड़की की कोई बात पसंद नहीं आ रही तो आप उसको तपाक से बोल दें बल्कि आपको धैर्य से काम लेना चाहिए और लड़की की तारीफ करना न भूलें। फिर चाहे वह उसके ड्रेसिंग सेंस की हो या फिर उसकी मुस्कुराहट या व्यवहार इत्यादि।
* आप कोशिश करें कि आप कम बोलें और आपकी आंखे ज्यादा। यानी आप अपने दिल की बात लड़की को अपनी आंखों से बयां करोगे तो लड़की को अच्छा लगेगा।
* आपमें बातचीत की कला होनी चाहिए। आप ऐसे बात करें जैसे आपसे अच्छा और मीठा कोई बोल ही नहीं सकता। फिर देखिए कैसे लड़कियां आपसे इंप्रेस होती है।
* आप अपनी सकारात्मक सोच के साथ ही सेंस ऑफ ह्यूमर भी अच्छा होना चाहिए जो कि लड़कियों को बहुत भाता है। गंभीर माहौल को लाइट बनाने की आपकी कला ही लड़की के दिल में आपकी जगह बना सकती है।
* यदि आपको कभी लड़की को डेटिंग पर पूछने या फिर घुमाने इत्यादि की पहल करनी पड़ती है तो आप हिचके नहीं बल्कि अपनी बात को खुशमिजाजी के साथ बता दें।
* इन टिप्स के साथ आप किसी भी लड़की को आराम से इंप्रेस कर सकते हैं और आप जिस लड़की का दिल जीतना चाहते हैं वो भी आपके इस व्यवहार से आपके पास खिंची चली आएगी
Friday, 18 November 2011
Thursday, 17 November 2011
कच्ची उम्र में प्यार
प्यार करना या किसी रिश्ते में बँधना बुरी बात नहीं है। बशर्ते आप उसे सही उम्र में सही ढंग से करें और सही मंजिल पर ले जाएँ। 13-14 साल की उम्र प्यार की महत्ता और गहराई को समझने के लिए बहुत कच्ची है। जाहिर है कि इस उम्र में यह रिश्ता भी बचकाना-सा ही होता है। स्कूली लड़कियों के लिए ब्वॉयफ्रेंड अच्छी चॉकलेट और महँगे गिफ्ट पाने का जरिया है तो वहीं लड़कों के लिए गर्लफ्रेंड का होना शान की बात है। उधर युवाओं में मूवी देखने और उच्चस्तरीय जीवन जीने की चाह में गर्लफ्रेंड-ब्वॉयफ्रेंड वाले रिश्ते रखना अब आम बात है। जाहिर है कि आज प्यार करना अधिकतर खेल के तौर लिया जा रहा है और चुभने वाली बात यह है कि स्कूल और कॉलेज जाने वाले किशोर और युवा "यूज एंड थ्रो" (इस्तेमाल करो और फेंको) की पॉलिसी अपना रहे हैं। प्यार करना उन्हें बड़ा आसान लगता है, पर इसे निभाना या किसी रिश्ते में बदलना बंधन लगता है। यह सिर्फ बच्चों या युवाओं तक सीमित नहीं रहा लगभग 80 प्रतिशत लोग इसी चलन को अपना रहे हैं, उन्हें अपना साथी बदलने में जरा भी हिचकिचाहट नहीं होती। आज एक घर में रहते हुए भी बच्चे अपने पैरेंट्स से दूर हो गए हैं।
व्यस्त माता-पिता भी बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते कि वे घंटों फोन पर किससे बात कर रहे हैं या इंटरनेट पर किससे चैटिंग कर रहे हैं? उधर माता-पिता के बीच बढ़ता तनाव तथा विवाहेत्तर संबंध आदि के चलते बच्चे भी या तो कुंठा में जीने लगते हैं या फिर वे भी उसी रास्ते पर चल पड़ते हैं।
आश्चर्यजनक बात है कि अब तो "फेसबुक" पर "रिलेशनशिप स्टेटस" अपडेट करने तक के लिए किशोरों को किसी की जरूरत नहीं है। आज किशोरों के आसपास की दुनिया तेजी से बदली है। उनके पास असीमित संसाधन हैं और जानकारी के ढेर स्रोत। जाहिर है कि इस चीज ने उन्हें मानसिक रूप से वक्त से पहले की परिपक्वता भी दी है। इसलिए रिश्ते बनाने के मामले में भी वे जल्दबाजी करते हैं, लेकिन जरूरत सिर्फ इस बात की है कि उन्हें उस रिश्ते की कद्र हो तथा वे प्रेम की गहराई को भी समझें।
हालाँकि इस बहाव में ऐसे भी कुछ लोग हैं, जो मजबूती से अपने आपको संभाले हुए हैं। अगर वे कोई नया रिश्ता बना रहे हैं तो उसे ताउम्र निभाने की ताकत भी उनमें हैं। साथ ही अपने रिलेशन्स को लेकर व्यावहारिक सोच-समझ भी वे रखते हैं। कई ऐसे किशोर तथा युवा भी हैं, जो अपने रिश्ते को लेकर बेहद गंभीर हैं और इस मामले में वे अपने माता-पिता से भी पारदर्शिता रखते हैं। अपने "प्रेम" के प्रति गंभीरता और दायित्व उन्हें जीवन में कुछ करने के लिए प्रेरित करता है।
ऐसे किशोर तथा युवा अपने साथी की प्रेरणा से अपना करियर, अपना जीवन बेहतर तरीके से संवार सकते हैं। अपने साथी के प्रति ईमानदारी व समर्पण का भाव उन्हें आत्मिक संतोष देता है। उनकी आपसी समझ समय के साथ-साथ इतनी गहरी होती जाती है कि एक-दूसरे की कमियाँ व खामियाँ वे नजरअंदाज करना सीख जाते हैं, जिससे उनका रिश्ता बना रहता है। एक-दूसरे की भावनाओं, विचारों और आदतों का वे सम्मान करते हैं। यह "बॉडिंग" उन्हें अंदर से बेहद खुश और मजबूत बनाती है और वे जिंदगी में आने वाली मुश्किलों को आसानी से सुलझा लेते हैं।
आवश्यकता इस बात की है कि प्रबल और सच्चा प्रेम जीवन को स्थिरता प्रदान करता है, यह बात सभी समझ पाएँ।
Monday, 14 November 2011
समझें बॉडी लैंग्वेज
व्यक्ति की पर्सनालिटी में उसकी बॉडी लैंग्वेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बातचीत के दौरान व्यक्ति अपने हाथों, गर्दन, आंखों, उठने-बैठने के अंदाज में कई ऐसे भाव देता है जो उसकी सोच को दर्शाते हैं। यही बॉडी लैंग्वेज कहलाता है।
अगर आप बॉडी लैंग्वेज को समझते हैं तो बातचीत के दौरान आप सामने वाले की विभिन्न मुद्राओं को देखकर उसके मनोभावों को कहे बिना भी समझ सकते हैं। वहीं बॉडी लैंग्वेज की समझ रखने वाले इसका भरपूर फायदा उठाते हैं।
क्या कहती है बॉडी लैंग्वेज:
यदि बातचीत के दौरान कोई नाखून कुतर रहा हो या बार-बार अपनी नाक को छूता हो तो यह उसकी नर्वसनेस को दर्शाता है। वहीं कपड़े पकड़कर खींचना या मोड़ना भी नर्वसनेस और बेचैनी का परिचायक होता है।
जब कोई सामने वाले व्यक्ति से बातचीत करते हुए आराम से बैठा हो और उसके दोनों हाथ सिर के पीछे आपस में जुड़े हों तो यह इस बात का इशारा है कि वह व्यक्ति आत्मविश्वास से लबरेज है।
जब कोई व्यक्ति दोनों पैर मोड़कर बैठने (उकडू बैठने) की मुद्रा में हो तो और ऐसा लग रहा हो कि वह उठने के लिए तैयार है तो या फिर कुर्सी में बैठे हुए उसके दोनों हाथ घुटनों पर हों और ठुड्डी आगे की ओर झुकी हो तो यह दर्शाता है कि वह अपने कार्य के लिए तत्पर है।
अगर कोई व्यक्ति अपने दोनों हिप्स पर हाथ रखकर खड़ा हो जैसे कोई पुरुष अपनी पैंट के पीछे की दोनों जेबों में हाथ डाले खड़ा हो तो यह आक्रामकता का परिचायक होता है। यानी वह व्यक्ति आक्रामक हो सकता है।
बातचीत के दौरान कई बार व्यक्ति सामने वाले की बात बड़े ध्यान से सुनता है और अपनी गर्दन को एक ओर थोड़ा सो झुका देता है। यह इस बात का इशारा होता है कि वह बातों में रुचि ले रहा है। लेकिन अगर कोई बात सुनते हुए सिर थोड़ा नीचे झुका दे तो इसका अर्थ है कि वह आपसे बोर हो रहा है।
वहीं कई दफा यह स्थिति निर्णय लेने की स्थिति को भी दिखाती है।
अगर बातों के दौरान सामने वाला बार-बार अपनी बैठने की अवस्था या पहलू को बदल रहा हो तो ऐसे में मानना चाहिए कि वह आपकी बातों से परेशानी महसूस कर रहा है।
लेकिन जब कोई स्टूडेंट इस अवस्था में स्कूल के बरामदे में खड़ा हो या अपने क्लास में टहल रहा हो ऐसे में यह दर्शाता है कि वह व्यक्ति कुछ पढ़ने के लिए बेचैन है।
अगर आप बॉडी लैंग्वेज को समझते हैं तो बातचीत के दौरान आप सामने वाले की विभिन्न मुद्राओं को देखकर उसके मनोभावों को कहे बिना भी समझ सकते हैं। वहीं बॉडी लैंग्वेज की समझ रखने वाले इसका भरपूर फायदा उठाते हैं।
क्या कहती है बॉडी लैंग्वेज:
यदि बातचीत के दौरान कोई नाखून कुतर रहा हो या बार-बार अपनी नाक को छूता हो तो यह उसकी नर्वसनेस को दर्शाता है। वहीं कपड़े पकड़कर खींचना या मोड़ना भी नर्वसनेस और बेचैनी का परिचायक होता है।
जब कोई सामने वाले व्यक्ति से बातचीत करते हुए आराम से बैठा हो और उसके दोनों हाथ सिर के पीछे आपस में जुड़े हों तो यह इस बात का इशारा है कि वह व्यक्ति आत्मविश्वास से लबरेज है।
जब कोई व्यक्ति दोनों पैर मोड़कर बैठने (उकडू बैठने) की मुद्रा में हो तो और ऐसा लग रहा हो कि वह उठने के लिए तैयार है तो या फिर कुर्सी में बैठे हुए उसके दोनों हाथ घुटनों पर हों और ठुड्डी आगे की ओर झुकी हो तो यह दर्शाता है कि वह अपने कार्य के लिए तत्पर है।
अगर कोई व्यक्ति अपने दोनों हिप्स पर हाथ रखकर खड़ा हो जैसे कोई पुरुष अपनी पैंट के पीछे की दोनों जेबों में हाथ डाले खड़ा हो तो यह आक्रामकता का परिचायक होता है। यानी वह व्यक्ति आक्रामक हो सकता है।
बातचीत के दौरान कई बार व्यक्ति सामने वाले की बात बड़े ध्यान से सुनता है और अपनी गर्दन को एक ओर थोड़ा सो झुका देता है। यह इस बात का इशारा होता है कि वह बातों में रुचि ले रहा है। लेकिन अगर कोई बात सुनते हुए सिर थोड़ा नीचे झुका दे तो इसका अर्थ है कि वह आपसे बोर हो रहा है।
वहीं कई दफा यह स्थिति निर्णय लेने की स्थिति को भी दिखाती है।
अगर बातों के दौरान सामने वाला बार-बार अपनी बैठने की अवस्था या पहलू को बदल रहा हो तो ऐसे में मानना चाहिए कि वह आपकी बातों से परेशानी महसूस कर रहा है।
लेकिन जब कोई स्टूडेंट इस अवस्था में स्कूल के बरामदे में खड़ा हो या अपने क्लास में टहल रहा हो ऐसे में यह दर्शाता है कि वह व्यक्ति कुछ पढ़ने के लिए बेचैन है।
बॉडी लैंग्वेज से पकड़ें दिल की नब्ज
मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लड़कों को आकर्षित करने के कुछ बेहद सरल उपाए बताए थे जो लड़कियों ने बहुत पसंद किए. अब जब इस ब्लॉग को कुछ पाठक मिल ही गए हैं तो मैंने सोचा कि चलो एक और ब्लॉग इस संदर्भ में लिखा जाए हालांकि यह थोड़ा आसान है और बहुत कारगर. यह टिप्स मैंने दैनिक जागरण पर ही देखी थी, पर शायद आप लोगों ने मिस कर दिया हो इसलिए इसे आप लोगों तक लेकर आया हूं.
1. अगर वह अपनी दोनों भुजाओं को छाती के नीचे बांधकर बैठा या खडा हो तो उसकी ऐसी बॉडी लैंग्वेज यह दर्शाती है कि वह आत्मकेंद्रित और अंतर्मुखी व्यक्तित्व वाला इंसान है. हो सकता है कि वह अपनी कुछ बातें आपसे छिपाना चाहता हो.
2. अगर वह लड़का आपके चेहरे की ओर देखकर सहज भाव से बातें कर रहा हो तो इसका अर्थ यह है कि वह आत्मविश्वास से पूर्ण है, लेकिन अगर वह आपसे नजरें मिलाकर बातें न करे तो इसका मतलब यह है कि उसमें आत्मविश्वास की कमी है और वह शर्मीले स्वभाव का है.
3. आपकी बातें सुनते समय अगर वह सामने की ओर हलका सा झुक जाता है तो आप यह समझें कि वह आपकी बातों में दिलचस्पी ले रहा है.
4. बोलते समय अगर वह बार-बार अपने बालों पर हाथ फेर रहा हो या उंगलियां चटका रहा हो तो इसका मतलब यह है कि वह झूठ बोल रहा है या तनावग्रस्त है.
5. आप से बातें करते समय अगर वह अपने पैर हिला रहा हो या मेज पर रखी किसी चीज को तोड़-मरोड़ रहा हो तो इस लक्षण से यह साबित होता है कि उसे आपकी बातें पसंद नहीं आ रहीं हैं या उसका ध्यान कहीं और है.
6. हाथ मिलाते समय अगर वह आपका हाथ मजबूती से पकड़े तो जाहिर होता है कि वह रिश्तों के प्रति समर्पित इंसान है. अगर वह आपका हाथ बहुत ढीले-ढाले अंदाज में पकड़े तो वह दुविधा में रहने वाला व्यक्ति है और ऐसे लोग भविष्य में वफादार साथी साबित नहीं होते.
7. अंत में, सबसे जरूरी बात यह है कि डेटिंग के दौरन कोई भी इंसान अपने व्यक्तित्व के सबसे अच्छे पहलू को दर्शाना चाहता है. ऐसे में उसका व्यवहार बेहद संयत होता है. अत: एक ही मुलाकात में लड़के के व्यक्तित्व का सही आकलन नहीं किया जा सकता. इसलिए कम से कम दो-चार बार मिलने के बाद ही लड़के के बारे में कोई राय बनाएं.
हमारे जीवन पर बॉडी लैंग्वेज का प्रभाव
मौजूदा कॉर्पोरेट इंडिया को सिर्फ डिग्रियों से लैस एंप्लॉइज की तलाश नहीं होती, बल्कि यह जमाना स्मार्ट एंप्लॉई का है। स्मार्टनेस से मतलब ऐसे एंप्लॉई से है, जिसमें प्रफेशनल क्वॉलिफिकेशन तो हो ही, साथ ही वह सॉफ्ट स्किल्स से भी भरपूर हो। अगर आप भी ऑफिस में अपनी बॉडी लैंग्वेज पर खासा ध्यान देते हैं, तो आपकी यह कुशलता आपको बाकी लोगों से अलग बनाएगी।
अगर आप किसी व्यक्ति से फोन पर बात करें और उसी व्यक्ति से आमने-सामने बात करें, तो दोनों स्थितियों के नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर हो सकता है। इसके पीछे है दोनों व्यक्तियों की बॉडी लैंग्वेज। दरअसल, बॉडी लैंग्वेज का प्रभाव हमारे जीवन के हर पल पर पड़ता है, भले ही हम इसे महसूस करें या नहीं? करियर में आगे बढ़ने के लिए भी जितनी जरूरी अच्छी परफॉर्मेंस है, उतना ही जरूरी है अपनी बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान देना।
इसके अलावा, अगर आपके अंदर अन्य लोगों की बॉडी लैंग्वेज पढ़ने का भी हुनर है, तो यह बात सोने पर सुहागा साबित होगी। अगर आप सेल्स के फील्ड में हैं, तो बॉडी लैंग्वेज समझने की कला आपके करियर को आगे बढ़ाने में बहुत मददगार साबित हो सकती है। आपको अपने संभावित ग्राहक की बॉडी लैंग्वेज देखकर ही पता चल जाएगा कि वह व्यक्ति आपके प्रॉडक्ट में दिलचस्पी ले भी रहा है या नहीं?
हमारा दिमाग लगभग हर बॉडी पॉस्चर से निकलने वाले संकेत को समझ सकता है। सही बॉडी लैंग्वेज को सीखना फॉरन लैंग्वेज सीखने जैसा है। हमें रोजमर्रा की आदतों में कुछ बेसिक पॉस्चर्स पर ध्यान देना चाहिए, जैसे : हमेशा आई कॉन्टैक्ट रखकर बात करना, थोड़ी-सी मुस्कान का महत्व जानना, हाथ बांधकर बातें करने से बचना, खुली हथेलियां गंभीरता और रेसेप्टिविटी को दर्शाती हैं, हाथ हिलाकर बातचीत करने से समझा जाता है कि आप बड़ी रुचि से बातें कर रहे हैं, जबकि मुंह के ऊपर या चेहरे पर हाथ रखना नेगेटिव बॉडी लैंग्वेज का हिस्सा है। आपके रिलेक्स्ड पॉस्चर का मतलब होगा कि आप कम्युनिकेशन के लिए तैयार हैं। ऑफिस में कभी भी किसी भी स्तर के व्यक्ति से ऊंची आवाज और तेज स्पीड में बात नहीं करनी चाहिए। इससे आप अपने व्यक्तित्व की गंभीरता खो देंगे।
चाहे आप ऑफिस में अपने कलीग्स से बातचीत करें या फिर अपनी डेस्क पर काम कर रहे हों, हमेशा अपनी बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान दें। कम शब्दों में हम कह सकते हैं कि बॉडी लैंग्वेज एक ऐसा हुनर है, जिसे हम अपने मूवमेंट्स, पॉश्चर्स और वॉयस टोन से हासिल करते हैं।
बॉडी लैंग्वेज पढ़ें
ऑफिस में किसी भी व्यक्ति से बात करते समय शब्दों के अलावा सामने वाले की बॉडी लैंग्वेज पढ़ने की भी कोशिश करनी चाहिए। खुद को सामने वाले के साथ इस तरह रिलेट करना बेहद जरूरी है। इससे आपको यह पता चल सकेगा कि वह व्यक्ति आपकी बातों में दिलचस्पी ले भी रहा है या नहीं? अगर कोई शुरुआत में तो आई कॉन्टैक्ट रखकर बातें कर रहा है, लेकिन धीरे-धीरे आंखें बचाने लगता है, तो इसका मतलब है कि वह बातचीत में दिलचस्पी खो रहा है। ऐसे ढेरों संकेत आपको सचेत कर सकते हैं। इसके बाद आपको अपनी अप्रोच बदल देनी चाहिए। अगर आप बॉस के साथ बातें कर रहे हैं या कोई सवाल पूछ रहे हैं, तो अक्सर बॉडी लैंग्वेज पढ़ने से ही आपको अपने ज्यादातर जवाब मिल जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति की जुबान कुछ और कह रही है और बॉडी लैंग्वेज कुछ और, तो उसकी बॉडी पर भरोसा कीजिए।
अकेले में प्रैक्टिस करें
अगर आप अपनी बॉडी लैंग्वेज से संतुष्ट नहीं हैं, तो घर पर शीशे के सामने इसे सुधारने की कोशिश करनी चाहिए। ध्यान रखें कि आपकी बॉडी लैंग्वेज भी वही बोले, जो आप मुंह से बोल रहे हैं। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप क्या कहते हैं, बल्कि यह है कि आप इसे किस तरह कहते हैं? हमेशा मुस्कराते रहें। जो लोग अपने बारे में अच्छा सोचते हैं, उनकी बॉडी लैंग्वेज अक्सर बेहतर होती है।
कुछ खास बातें
वैसे तो बॉडी लैंग्वेज पर बरसों से रिसर्च की जा रही है। अलग-अलग लोगों ने पॉजिटिव बॉडी लैंग्वेज के बारे में कई बातें बताई हैं, जिन्हें एक आर्टिकल में समेट पाना मुश्किल है। फिर भी मोटे तौर पर कुछ बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए, जिससे ऑफिस में आपकी इमेज एक अच्छे वर्कर की बन सके। चाहे बॉस हो या कलीग हमेशा आई कॉन्टैक्ट रखकर बातें करें, खुली हथेलियां गंभीरता और रेसेप्टिविटी को दर्शाती हैं, करीब रहकर बात करना यानी इंटरेस्ट लेना और दूर होने का मतलब है बातचीत में ध्यान नहीं होना, रिलेक्स्ड पॉस्चर का मतलब होगा कि आप कम्युनिकेशन के लिए तैयार हैं। ऑफिस में हाथ बांधकर खड़ा नहीं होना चाहिए, यह डिफेंसिवनेस और विरोध का संकेत है। हाथ हिलाकर बातचीत करने से समझा जाता है कि आप बड़ी रुचि से बातें कर रहे हैं। मुंह के ऊपर या चेहरे पर हाथ रखना नेगेटिव बॉडी लैंग्वेज का हिस्सा है। ऑफिस में कभी भी किसी भी स्तर के व्यक्ति से ऊंची आवाज और तेज स्पीड में बात नहीं करनी चाहिए। इससे आप अपने व्यक्तित्व की गंभीरता खो देंगे।
तो, फिर जुट जाइए मिशन बॉडी लैंग्वेज में। यकीन जानिए, करियर में जितनी महत्वपूर्ण जगह आप अपने काम से बनाएंगे है, उतने ही महत्वपूर्ण आप पॉजिटिव बॉडी लैंग्वेज को अपनाकर भी बन सकेंगे।
Sunday, 13 November 2011
खुले मन से संवाद बढ़ाता है प्रेम
पति-पत्नी, माँ-बाप, बच्चे, भाई-बहन, सगे-संबंधी, आस-पड़ोस हो या दोस्त-अहबाब या प्यार करने वाले, आपस में संवाद बनाते वक्त किसी अनजाने डर के कारण सतर्क रहते हैं। यही वह स्थिति है जिसके कारण नए रिश्ते की शुरुआत नहीं हो पाती है। यह डर ही है जो अच्छे रिश्ते की संभावना को समाप्त कर देता है।
ऐसे ही डर से परेशान हैं संतोष, असीम, अमित, प्रवीण जैसे अनेक नौजवान। एक लड़की से मुखातिब होते समय इनकी हिम्मत जवाब दे देती है जबकि वे लड़कियाँ उन्हें देखकर अपने चेहरे पर पहचान का भाव लाती हैं। यूँ तो वे उनसे बहुत कुछ कहना चाहते हैं पर कह नहीं पाते हैं। उनके सामने जाते ही उनकी जुबान को ताला लग जाता है और उनकी घिग्घी बँध जाती है। वे हजार कोशिशों के बावजूद सामान्य नहीं रह पाते हैं। लड़की से कुछ न बोल पाने के कारण उनका मन घुटन से भर जाता है और बहुत सारा समय अपने ऊपर खीझने में बीत जाता है। उन्हें लगता है क्या करें जो वे इस समस्या से पार पाएँ।
जिन लड़कों की बचपन से महिला दोस्त नहीं रही हैं उन्हें ये समस्याएँ ज्यादा आती हैं। कई लड़के ऐसे भी बड़े होते हैं जिनके घर में रिश्तेदार हमउम्र बहनें नहीं होती हैं। ऐसे नौजवान लड़के नहीं समझ पाते हैं कि वे लड़कियों से कैसे बात करें। जीवन में लड़कियों से सामान्य दोस्ती नहीं होने के कारण जो पहली लड़की भाती है उसे जाने बिना ही वे दिल दे बैठते हैं या बहुत दूर की सोच लेते हैं। इसी कारण संकोच, घबराहट और भी बढ़ जाती है।
इतनी सारी अपेक्षाओं के बाद संवाद बनाने में डर तो लगेगा ही। अगर लड़की ने उसी लहजे और डिग्री में जवाब नहीं दिया तो ठुकराए जाने का भय भी कदम रोक देता है। जिस प्रकार कोई व्यक्ति नौकरी या काम लेने जाए तो सारी तैयारी और योग्यता के बावजूद इनकार का डर उस पर हावी रहता है क्योंकि उस वक्त वह सामने वाले के आकलन पर होता है। अगर हम कई साक्षात्कार दे चुके होते हैं और हमारे पास बेहतर विकल्प मौजूद होता है तो हमारा डर भी कम होता है।
उसी प्रकार यदि आप किसी व्यक्ति से चाहे वह लड़की या लड़का हो बिना किसी अपेक्षा से मिलें तो आपको उससे संवाद बनाने में डर नहीं लगेगा। यदि कोई साधारण सी बात का भी जवाब नहीं देती है तो उससे बात ही क्यों करनी है। आपने उससे टाइमटेबल पूछ लिया। किताब, नोटबुक या पेन माँग लिया और उसने सहजता से आपकी बातों का जवाब दे दिया, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह आपको प्यार करने लगी है। चार दिन की बातचीत के बाद यदि आप प्रेम पत्र पकड़ा दें तो वह लड़की अवश्य ही आपको भला-बुरा कहेगी।
जिन लड़कों को लड़कियों से बात करने में डर लगता है उन्हें केवल एक लड़की के बारे में नहीं सोचकर आगे बढ़ना चाहिए बल्कि कई लड़कियों से बातचीत करनी चाहिए ठीक वैसे ही जिस प्रकार आप किसी भी लड़के साथी से मुखातिब होते हैं। उनसे कोई विशेष अपेक्षा नहीं होती है तो कोई द्वंद्व भी मन में पैदा नहीं होता है। इसी प्रकार लड़कियों से भी पुरुष साथियों की तरह बात करनी चाहिए। समय बीतने के साथ-साथ ही पता चल सकता है कि उनमें से कोई अच्छी दोस्त या प्रेमिका बन भी सकती है या नहीं।
Sunday, 6 November 2011
अपने व्यक्तित्व का विकास कैसे करे
किसी भी मनुष्य की पहचान उसके व्यक्तित्व से ही होती है। प्रभावशाली व्यक्तित्व के स्वामी को कभी भी असफलता का मुख नहीं देखना पड़ता, वे आसानी के साथ दूसरों को प्रभावित कर लेते हैं तथा उन्हें अपना मित्र बना लेते हैं।
नीचे कुछ बातें दी जा रही हैं जिनकी सहायता से हम अपने व्यक्तित्व का विकास करके स्वयं को प्रभावशाली कैसे बना सकते हैं:
दूसरों के प्रति स्वयं का व्यवहार

नीचे कुछ बातें दी जा रही हैं जिनकी सहायता से हम अपने व्यक्तित्व का विकास करके स्वयं को प्रभावशाली कैसे बना सकते हैं:
दूसरों के प्रति स्वयं का व्यवहार
- दूसरों को अपमानित न करें और न ही कभी दूसरों की शिकायत करें। याद रखें कि अपमान के बदले में अपमान ही मिलता है।
- दूसरों में जो भी अच्छे गुण हैं उनकी ईमानदारी के साथ दिल खोल कर प्रशंसा करें। झूठी प्रशंसा कदापि न करें। यदि आप किसी की प्रशंसा नहीं कर सकते तो कम से कम दूसरों की निन्दा कभी भी न करें। किसी की निन्दा करके आपको कभी भी किसी प्रकार का लाभ नहीं मिल सकता उल्ट आप उसकी नजरों गिर सकते हैं।
- अपने सद्भाव से सदैव दूसरों के मन में अपने प्रति तीव्र आकर्षण का भाव उत्पन्न करने का प्रयास करें।
- सभी को पसंद आने वाला व्यक्तित्व
- दूसरों में वास्विक रुचि लें। यदि आप दूसरों में रुचि लेंगे तो दूसरे भी अवश्य ही आप में रुचि लेंगे।
- दूसरों को सच्ची मुस्कान प्रदान करें।
- प्रत्येक व्यक्ति के लिये उसका नाम सर्वाधिक मधुर, प्रिय और महत्वपूर्ण होता है। यदि आप दूसरों का नाम बढ़ायेंगे तो वे भी आपका नाम अवश्य ही बढ़ायेंगे। व्यर्थ किसी को बदनाम करने का प्रयास कदापि न करें।
- अच्छे श्रोता बनें और दूसरों को उनके विषय में बताने के लिये प्रोत्साहित करें।
- दूसरों की रुचि को महत्व दें तथा उनकी रुचि की बातें करें। सिर्फ अपनी रुचि की बातें करने का स्वभाव त्याग दें।
- दूसरों के महत्व को स्वीकारें तथा उनकी भावनाओं का आदर करें।
- तर्क का अंत नहीं होता। बहस करने की अपेक्षा बहस से बचना अधिक उपयुक्त है।
- दूसरों की राय को सम्मान दें। ‘आप गलत हैं’ कभी भी न कहें।
- यदि आप गलत हैं तो अपनी गलती को स्वीकारें।
- सदैव मित्रतापूर्ण तरीके से पेश आयें।
- दूसरों को अपनी बात रखने का पूर्ण अवसर दें।
- दूसरों को अनुभव करने दें कि आपकी नजर में उनकी बातों का पूरा पूरा महत्व है।
- घटनाक्रम को दूसरों की दृष्टि से देखने का ईमानदारी से प्रयास करें।
- दूसरों की इच्छाओं तथा विचारों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनायें।
- दूसरों को चुनौती देने का प्रयास न करें।
- दूसरों का सच्चा मूल्यांकन करें तथा उन्हें सच्ची प्रशंसा दें।
- दूसरों की गलती को अप्रत्यक्ष रूप से बतायें।
- आपकी निन्दा करने वाले के समक्ष अपनी गलतियों के विषय में बातें करें।
- किसी को सीधे आदेश देने के बदले प्रश्नोत्तर तथा सुझाव वाले रास्ते का सहारा लें।
- दूसरों के किये छोटे से छोटे काम की भी प्रशंसा करें।
- आपके अनुसार कार्य करने वालों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन करें।
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