Saturday, 9 July 2011

प्यार करते हो तो उसको प्रकट करो

प्यार का प्रदर्शन आवश्यक है। यदि आप किसी को प्यार करते हो तो उसको प्रकट करिये, दिखाइयें। व्यस्तता से भरे जीवन में प्यार को छिपाने की आवश्यकता नहीं है। अपनी चाहत सामान्य लोगो से तो कहनी ही पड़ेगी। वे आपके प्यार को अन्यथा समझ न पाऐगे तो प्यासे ही रहेंगे। सबसे कमजोर व दुःखी को प्यार की ज्यादा जरुरत है।
यह सत्य है कि बुद्व पुरुषों या ज्ञानियों के सामने चाहत प्रदर्शित करने की जरुरत नहीं हेै। चूंकि आपके प्यार एवं समर्थन की उन्हें जरुरत नहीं है। लेकिन आम जन न तो आपके प्यार को पहचान सकता है, न प्रेम से परिपूर्ण है। उसे आपसे प्यार चाहिए इसलिए प्रदर्शित करों। तभी अमिताभ बच्चन बागवान में कहता है कि अधिकांश लोग अपनी पत्नी के प्रति प्यार को व्यक्त नही करते है। मैं यह गलती नहीं करता। मैं अपनी पत्नी के प्रति प्यार का बार-बार व्यक्त करता हूँ।
वह अन्यथा आपके प्यार से वंचित रह जायेगा। इसलिए प्यार के प्रदर्शन में बुराई नहीं है। व्यक्त करना समय की मांग है। अतः उसे व्यक्त करने की कला जानो। सम्बन्धों की दीवार इसी से मजबूत होगी।
माना कि कोई तुमसे प्यार करता है तो आप चाहते है न कि वह अभिव्यक्त करे। आप इसका आन्नद उठाओं। ठीक अन्य साथी भी उसी प्रकार को प्यार को प्रकट करने पर ही आन्नदित होते है।

Friday, 8 July 2011

कैसे पूरी हो लडको की हसरतें

dating tipsसभी लड़कों का यह ख्वाब होता है कि उनके पास भी एक खूबसूरत सी गर्लफ्रेंड हो जिसके साथ वह घूम सकें, पार्टियों या डिस्को में डांस कर सकें या फिर खाली समय में वह उसके साथ मूवी जाएं. लड़की पटाने की कोशिश तो लगभग सभी करते हैं लेकिन बहुत कम लोग इसमें सफल होते हैं. कुछ लड़के लड़कियों को डेट पर तो ले जाते हैं लेकिन वहां जा कर भी उनको निराशा ही हाथ लगती है.

लेकिन अब उन लड़को को निराश होने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि लड़कियों को पटाने में असफल हुए लड़के भी पास हो सकते हैं. इसके लिए आपको केवल हमारे दिए बताये गए पांच सुझावों को अपनाना है.

1. झूठी कहानी गढ़िए : लड़की को अपने साथ बातचीत में शामिल करने के लिए उससे एक कहानी बताएं. भले ही वह झूठी कहानी क्यों ना हो.dating5 कहानी बनाने के लिए आपके द्वारा पढ़ी गई सभी नॉवेल या किताबों का इस्तेमाल करना पड़े तो उसका भी प्रयोग करें. स्कूल में घटित घटना को भी रोमांचक ढंग से सुनाएं.

2. विश्वास के साथ हास्य मिक्स करें: एक लड़के के बारे में जिन दो चीजों पर एक लड़की सबसे ज़्यादा ध्यान देती है वह हास्य और विश्वास होती है. अतः इन दोनों के मिश्रण को अपनी सफलता की कुंजी बनाएं. मज़ेदार बातें करें लेकिन एक दायरे के अंदर. इससे आप अप्रत्याशित बन जाते हैं और आप पर लोग ध्यान देते हैं.

3. उसे चिढ़ाओ: अगर आप लड़की को चिढ़ाते हैं तो उससे यह पता चलता है कि वह लड़की आपकी बातों पर ध्यान दे रही है कि नहीं परन्तु ध्यान दें इसमें कुछ भी भद्दा नहीं होना चाहिए. क्योंकि अगर चिढ़ने में मज़ा आएगा तो ही लड़की आपकी तरफ़ आकर्षित होगी.

dating4. पूर्वानुमान: पूर्वानुमान से मतलब है किसी भी परिस्थिति का पहले से ही आकलन करना. इसके लिए कुछ कहने से पहले लोगों के बारे में जान लें. इससे आपको पता चल जाएगा कि कौन सी बात आपके गर्लफ्रेंड के लिए सही है.

5. जानिए कैसे रिश्ते बनते है : रिश्तों में प्रगति लाने से पहले यह ज़रुरी है कि आप जानें कि रिश्ते कैसे बनते हैं. रिश्ते बनाना एक दिन का खेल नहीं है. रिश्ता बनाने के लिए हमें एक समय लगता है अतः हमें मालूम होना चाहिए कि प्रत्येक स्तर में कितना समय लगता है. इससे आप को पता चल जाएगा कि एक महिला को क्या चाहिए

लव के पीछे है केमिकल लोचा

आखिर 'लव' में ऐसा क्या है जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी मिस्ट्री माना गया है। अपने प्रेमी के लिए ललक ऐसी चीज है, जिसने वैज्ञानिकों को भी लम्बे वक्त तक हैरान किया है। प्यार करने वालों के बीच इस पागलपन का कारण जानने के लिए जाने कितनी खोजें हुई। अगर उन खोजों पर यकीन करें तो दो प्रेमियों की इमोशंस और उनके चेंज होने के पीछे जो असली कारण है, वह है शरीर में होने वाला केमिकल लोचा।
वैज्ञानिकों के अनुसार प्यार की अलग-अलग स्टेजेस जैसे इन्फैचुएशन, कडलिंग, अट्रैक्शन यहां तक कि बिट्रेयल के पीछे भी काम करते हैं कुछ खास केमिकल्स।
वैज्ञानिक मानते हैं कि आकर्षण असल में इन न्यूरोकेमिकल्स के वर्चुअल एक्सप्लोजन जैसा है। जिसके बाद आपको फील गुड होने लगता है। पीईए, एक केमिकल है जो नर्व सेल्स के बीच इन्फॉर्मेशन का फ्लो बढ़ा देता है। इस केमिस्ट्री में डोपामाइन और नोरिफिनेराइन नामक दो केमिकल्स भी बड़ा इंट्रेस्टिंग काम करते हैं। डोपामाइन हमें फील गुड का अहसास कराता है और नोरिफिनेराइन एड्रिनैलिन का प्रोडक्शन बढ़ा देता है। किसी को देखकर बढ़ने वाली हार्ट बीट इन कैमिकल्स की ही देन है, जिसे प्रेमी कुछ कुछ होना समझ बैठते हैं। ये तीनों कैमिकल्स कम्बाइन होकर काम करते हैं। इन्फैचुएशन जिसे इन जनरल लोग आपकी 'केमिस्ट्री' कहते हैं। यही कारण है कि नए प्रेमी खुद को हवा में उड़ता हुआ, बेहद ऊर्जावान सा फील करते हैं।
किसी के साथ कडल अप करने का मन बस यूं ही नहीं होता। इसके पीछे भी एक केमिकल है जनाब! ये है ऑक्सिटोसिन, जिसे कडलिंग केमिकल भी कहा गया है। वैसे तो ऑक्सिटोसिन को मदरहुड से भी संबंध किया जाता है लेकिन ये भी माना जाता है कि ये महिला और पुरूष दोनों को ज्यादा कूल और दूसरों की फीलिंग्स के लिए सेंसिटिव बनाता है। सेक्सुअल अराउजल में भी इसका खास रोल है। ऑक्सिटोसिन प्रोडक्शन ट्रिगर करने के पीछे इमोशनल रीजंस भी हो सकते हैं और फिजिकल भी। यानी अपने लवर की फोटो देखने, उसके बारे में सोचने से लेकर उसकी आवाज सुनने, उसके किसी खास अपीयरेंस तक कुछ भी आपकी बॉडी में ऑक्सिटोसिन का प्रोडक्शन बढ़ा सकता है। अगर प्रेमी फिजिकली प्रेजेंट हैं तो यही हार्मोन एक-दूसरे को गले लगाने और कडल करने के लिए उकसाता है।
इन्फैचुएशन कम होते ही केमिकल्स का एक नया ग्रुप टेकओवर कर लेता है। इसे क्रिएट करते हैं एन्डॉर्फिन्स। ये केमिकल्स पीईए जैसे एक्साइटिंग नहीं होते लेकिन ज्यादा एडिक्टिव और कूल करने वाले होते हैं। यही कारण है कि इन्फैचुएशन के बाद प्यार की अगली स्टेज यानी अटैचमेंट में इंटिमेसी के साथ-साथ ट्रस्ट, वॉ‌र्म्थ और साथ वक्त बिताने जैसी इमोशंस फील की जाती हैं। जितना ज्यादा लोग इन केमिकल्स के आदी हो जाएं वो उतना ही इनसे दूर नहीं रह सकते। यही कारण है कि लम्बे चलने वाले लव अफेयर्स या कोई खास रिश्ता टूटना आप बर्दाश्त नहीं कर पाते। इसके पीछे रीजन है इन केमिकल्स का लत लगना। अपने पार्टनर के दूर जाने पर उसे मिस करने के पीछे भी यही एंडॉर्फिन्स होते हैं।
प्रेमी के दूर जाने पर ये केमिकल्स बॉडी में कम होने लगते हैं और इनके आदी होने की वजह से आप अपने प्रेमी, या विज्ञान की भाषा में कहें तो इन हारमोन्स की कमी महसूस करने लगते हैं।

Tuesday, 5 July 2011

पर्यटकों को आकर्षि‍त करता पूर्वोत्तर


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भीड़-भाड़ से दूर और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पूर्वोत्तर पर्यटकों को खूब पसंद आ रहा है तो इसकी ठोस वजह भी है। पूर्वोत्तर राज्यों का परिवेश, मौसम और आत्मीयता पर्यटकों को आकर्षित कर लेती है। पूर्वोत्तर के पास पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रकृति प्रदत्त हर चीज है।

चीड़ से भरे नीले पहाड़ हैं, लाल नदियाँ हैं, जंगल हैं, दुर्लभ वन्यजीव से परिपूर्ण राष्ट्रीय पार्क हैं, बर्फ से ढंकी पहाड़ियाँ हैं, सड़क पर चलते अचानक बादलों से घिर जाने का सुखद एहसास है तो धार्मिक आस्था के लिए कामाख्या मंदिर है, विश्व का सबसे बड़ा नदी-द्वीप माजुली है, आकाश से बातें करता तवांग है और प्रसिद्ध बौद्ध मठ हैं।

हर तरह के पर्यटकों की पसंद की जगह पूर्वोत्तर में उपलब्ध हैं। पहले उग्रवाद और यातायात के बेहतर साधन के अभाव में लोग यहाँ आने से बचते थे पर अब बहुत कुछ बदल गया है। यही वजह है कि प्रति वर्ष घरेलू और विदेशी सैलानियों की संख्या बढ़ रही है और इसी के साथ पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएँ जुटाई जा रही हैं।

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अब पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार गुवाहाटी से दिल्ली  दूर नहीं है। दिल्ली ही नहीं, देश के हर बड़े शहर अब गुवाहाटी से सीधे जुड़ गए हैं। गुवाहाटी से दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर,  जैसे शहरों के लिए सीधी हवाई और रेल सेवाएं हैं। दिल्ली से गुवाहाटी के बीच प्रति दिन करीब एक दर्जन उड़ानें हैं। सुबह पाँच बजे दिल्ली से पहली उड़ान है और शाम सात बजे गुवाहाटी से अंतिम उड़ान। इसी तरह कोल्कता  और गुवाहाटी के बीच सुबह से देर शाम तक हवाई सेवा मौजूद है।

गुवाहाटी से दिल्ली के बीच सीधी राजधानी रेल सेवा है जिससे बनारस  या कानपुर होते हुए 28 घंटे में पहुँचा जा सकता है। गुवाहाटी और कोलकाता के बीच सुपर फास्ट ट्रेनें चल रही हैं। दक्षिण भारतीय शहरों के लिए पुरी और भुवनेश्वर के रास्ते रोज रेल सेवा उपलब्ध है जबकि गुवाहाटी से पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों - इंफाल, अगरतला, आइजल, दिमापुर (कोहिमा) के लिए नियमित उड़ानें हैं।

गुवाहाटी से ही शिलांग, ईटानगर और तवांग के लिए सड़क यातायात के अलावा हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है। गुवाहाटी से पूर्वोत्तर के हर शहर के लिए सीधी और आरामदायक बसें चलती हैं। पूर्वोत्तर के अधिकांश इलाकों में बिना किसी भय के रात-दिन घूमा जा सकता है। खास बात है कि यहाँ महिलाओं के साथ कभी अभद्र व्यवहार नहीं होता है।

महिला पर्यटक सुरक्षित रहने के एहसास के साथ मौज-मस्ती कर सकती हैं। कहीं भी आने-जाने की पाबंदी नहीं है। सिर्फ अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नगालैंड में प्रवेश करने के लिए पर्यटकों को इनरलाइन परमिट की जरूरत पड़ती है और इसे पाने की प्रक्रिया काफी सहज है। दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी में इन राज्यों के स्थानीय आयुक्त कार्यालयों में नाम मात्र के शुल्क पर इनलाइन परमिट मिलता।

मुस्कराहट सफल और सुखी जीवन की घोषणा


अंग्रेजों की एक कहावत है, 'लाफ्टर इज द बेस्ट मेडिसिन' अर्थात हंसी सर्वश्रेष्ठ दवा है। यह जहां मानसिक तनाव से राहत दिलाती है, वहीं मानवीय संबंधों को सुखद बनाकर हमारे पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन को भी सफल बनाती है। आज हंसी वैज्ञानिकों के लिए गंभीर शोध का विषय बनी हुई है। इसके चिकित्सीय प्रभावों का काफी गहराई से अध्ययन किया जा रहा है।

अनुसंधानों से स्पष्ट हो चुका है कि हंसी स्वास्थ्य के लिए उतनी ही आवश्यक है, जितना कि उचित भोजन। जहां क्रोध, भय, ईर्ष्या, द्वेष जैसे नकारात्मक भाव शरीर पर घातक प्रभाव डालते हैं, वहीं हंसी के साथ मानव शरीर से ऐसे रसायनों का उत्सर्जन होता है, जो स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव डालते हैं। ठहाके लगाकर हंसने से शरीर में एंडोर्फिन नामक हॉर्मोन का उत्सर्जन होता है, जो शरीर में स्फूर्ति एवं प्रसन्नता लाता है।

प्रसन्न चित्त रहना मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे आवश्यक है। आप गौर करेंगे कि उदास रहने वालों की अपेक्षा खुशमिजाज लोग अधिक स्वस्थ, उत्साही और स्फूर्तिवान होते हैं। हंसने से व्यक्ति अपने तनावों और कुंठाओं को भूलकर स्वयं को हल्का अनुभव करता है। ऐसा समझा जाता है कि यदि कोई दिन में 15 बार हंसे तो उसके डॉक्टर का बिल लगभग न के बराबर होगा। पश्चिम के एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक जोनाथन स्विफ्ट इसे बड़े ही दिलचस्प ढंग से समझाते हैं। वे कहते हैं कि दुनिया के तीन सबसे बड़े चिकित्सक हैं - डॉक्टर डाइट यानी संतुलित आहार, डॉक्टर पीस यानी शांति और डॉक्टर स्माइल यानी मुस्कान।

हास्य के लाभ अनगिनत हैं, यह थके हुए के लिए विश्राम है, हतोत्साहित के लिए दिल का प्रकाश, उदास के लिए दिन की धूप है तथा रोगी के लिए प्रकृति का सवोर्त्तम रोग प्रतिरोधी। इस पर खर्च कुछ नहीं आता, किंतु यह देता बहुत है। हंसी शरीर के विकारों का प्राकृतिक ढंग से उपचार करती है, हास्य तनाव से मुक्त करता है।

मुस्कराते हुए मनुष्य का सौंदर्य तत्काल दूना हो जाता है। क्रुद्ध व्यक्ति भी यदि मुस्कराने लगे तो उसका चेहरा कमल जैसा खिला हुआ दिखेगा। मुस्कराहट से आत्मविश्वास एवं आंतरिक संतोष झलकता है। होठों पर टंगी हुई यह तख्ती बताती है कि इस व्यक्ति के जीवन में सुख और संतोष है। इस अर्थ में मुस्कराहट सफल और सुखी जीवन की घोषणा है।

कुछ विचारकों के अनुसार हंसी एक सुखद अनुभव है, इसलिए इसके अवसरों को चूको मत। यदि हंसी आए तो खूब हंसो, खूब जम कर हंसो। हंसी क्यों आई, कब आई? इस सोच में मत पड़ो। हंसी स्वच्छंद झरने की तरह है। हंसाने वाली घटनाओं को याद करके, उन विनोद एवं उल्लासपूर्ण क्षणों को अनुभव करके, हम कभी भी अपने अंदर वह उल्लास पैदा कर सकते हैं। हंसी के इन क्षणों में शरीर रोमांचित हो उठता है और एक तरह से वह भीतर जमा हुए दिन भर के भारीपन को बुहार कर बाहर निकाल देता है।

आपने देखा होगा कि दिल्ली के कई सार्वजनिक पार्कों में वृद्ध व अन्य लोग खुलकर ठहाके लगाते हैं। ऐसे अभ्यास बुढ़ापे के एकाकीपन में विशेष रूप से उपयोगी है, जब उम्र के इस पड़ाव पर बहुतों को यह शरीर बोझ की तरह लगने लगता है। अकेले रहने की अपेक्षा लोगों के बीच रहने पर हंसी की संभावना कई गुणा अधिक होती है। हंसी बुढ़ापे को नजदीक आने नहीं देती। यह शरीर के लिए संजीवनी है।

आज भौतिकवाद की आंधी में हम इस तरह से बह गए हैं कि हंसते-हंसाते जीने का जज्बा ही भूल गए हैं। हमारी आकांक्षाएं बढ़ गई हैं। उपलब्धियां हमें संतुष्ट नहीं कर पातीं। ऐसे में दूसरों का संतोष एवं प्रगति भी हमारे लिए ईर्ष्या-द्वेष का कारण बन रही है। हंसी के यांत्रिक अभ्यास के साथ यदि हम जीवन की आध्यात्मिक शैली को भी अपना लें, तो ऐसे सादे- सरल जीवन में हंसी-खुशी के ढेरों अवसर आएंगे, जहां हम इनसे लाभान्वित होंगे। हमारा पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन भी सरस और सुखी होगा। हास्य रूपी यह नैसगिर्क टॉनिक या दिव्य अस्त्र आजमाने योग्य है। इसे जीवन का एक अभिन्न अंग बना कर हम पूरे जीवन को उत्सव में बदल दे सकते हैं।

प्यार और दोस्ती के बीच की लकीर

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,
हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,
कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की
वरना इस जमीं पर भगवान है दोस्ती



ऐसा कई बार होता है जब हमें लगता है कि हमारा दोस्त ही हमारा प्यार है. कई बार यह सही साबित होता है तो कई बार इतना गलत कि हमसे एक दोस्त छिन जाता है. दोस्‍तों की भीड़ में हम कभी-कभी प्रेमी को पहचानने में गलती कर देते हैं. कई बाद जिसे आप दोस्‍त कहते हैं उसी से प्‍यार करने लगते हैं. जबकि आपके प्रति उसके दिल में प्रेमिका जैसी कोई फीलिंग नहीं होती है. इसलिए दोस्‍ती और प्रेम के बीच सीमा रेखा खींचना बहुत जरूरी है.

love and dosti कोई हमारी बहुत मदद करता है और हमारे प्रति स्नेह दर्शाता है तो हम कहने लगते हैं कि यार हो सकता है वह लड़की या लड़का हमें प्यार करता है. लेकिन उस वक्त हम यह नहीं सोचते कि वह जिसे हम प्यार कह रहे है वह दरअसल दोस्ती का ही एक रुप है. दोस्ती प्यार से भी बढ़कर होती है. यूं तो सब प्यार को ही सबसे खूबसूरत मानते हैं लेकिन प्यार भी एक सीमा के बाद बदल जाता है पर दोस्ती तो होती ही हैं जिंदगी भर निभाने के लिए है.

प्यार और दोस्ती के बीच एक बहुत ही पतली सी लाइन है जो दोनों को अलग करती है. इस पतली सी लाइन को पहचानने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ टिप्‍स बताएं है जो इस प्रकार हैं:

आप किसी दोस्‍त के प्रति अपनी भावनाओं को लेकर उलझन में हैं तो इन सवालों के जवाब देकर वास्‍तविकता का पता लगा सकते हैं




• क्या उसकी/उसका फोन आपके चेहरे पर मुस्कान लाता है?

• उसे खुश करने के लिए क्या आप गुप्त प्रयास करते हैं?

• क्या आप उसे अपने जीवन में विशेष महत्‍व देते हैं. साथ ही उसे स्‍पेशल होने का एहसास करवाते हैं.

• वह जब आपके किसी दोस्‍त से बात करता/करती है तो क्या आप ईर्ष्या करते हैं?

• जब वह आपको बधाई देता है तो आप शर्मा जाते हैं?

• क्या आपको ऐसा लगता है कि उसके बिना आपका जीवन अधूरा है?

यदि इन सभी प्रश्‍नों का जवाब हां है तो वह मात्र आपका दोस्‍त नहीं बल्कि वह आपका प्रेमी बन गया है. यह आपको बकवास भी लग सकता है. लेकिन गंभीरता से विचार करेंगे तो पता चलेगा कि यह कितना सही है.

अपने प्यार को अपनी फीलिंग बताएं. हो सकता है वह अपनी भावनाओं को व्‍यक्‍त करने में समय लगाए. लेकिन कुछ ही दिनों में आपका प्‍यार आपको मिल जाएगा. फिर देर किस बात की आज से ही कोशिश शुरु कर दें.

लेकिन अगर इन सवालों का जवाब न है और फिर भी आपका उसके प्रति आकर्षण कम नहीं हुआ बल्कि और बढ़ा है तो जरा संभल कर क्योंकि जिसे आप प्यार कह रहे हैं, हो सकता है वह महज दोस्ती का ही एक रुप हो.

मजे के अलावा भी बहुत कुछ है फ्लर्टिंग

लड़के-लड़कियों का एक दूसरे से प्यार जताना और चुहल सिर्फ मजा लेने की ही चीज नहीं। फ्लर्टिंग आपके लिए बहुत काम की साबित हो सकती है। एक नई रिसर्च तो ये भी कहती है कि फ्लर्टिंग आपकी रोमांटिक जिंदगी की कहानी तय करती है।

बार में अकेले बैठे किसी अजनबी की ओर आपका झुकाव और फिर उसे पास बुलाने के लिए की गई पहल या फिर यूँ ही अकेले बैठ कर उस अजनबी के अपनी ओर आने का इंतजार इन दोनों के बीच का अंतर कोई जान ले तो वो रिश्तों के चक्रव्यूह को समझने की तरकीब जाने लेगा।

कंसास यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशन स्टडीज के प्रोफेसर जेफरी हॉल तो यहीं मानते हैं। जेफरी ने हाल ही में डेटिंग पर जाने वाले लोगों की फ्लर्टिंग के स्टाइल पर एक रिसर्च पूरी की है। रिसर्च के दौरान उन्होंने करीब 5100 लोगों से उनके रोमांस के दौरान की बातचीत और हरकतों के बारे में बात की।

हॉल कहते हैं, 'किसी के बारे में अपने आकर्षण को बताने का तरीका ये जाहिर कर देता है कि पिछले रिश्ते में उसकी क्या चुनौतियाँ रही।' हॉल ये भी मानते हैं, 'इस बारे में लोगों की जागरूकता उन्हें गलतियों से बचा सकती है और प्रेम संबंधों में उन्हें सफलता दिलाने में मददगार साबित होगी।'

हॉल के मुताबिक मुख्य रूप से फ्लर्टिंग के पाँच तरीके होते हैं। पहला है शारीरिक इसमें लोग अपने प्रेमी को अपने यौन इच्छाओं का अहसास दिलाते हैं और अमूमन जल्दी ही रिश्ता बनाने में कामयाब हो जाते हैं। ऐसा करने वालों के बीच बेहतर यौन संबंध होते हैं और अपने साथी के लिए ज्यादा भावनात्मक जुड़ाव भी।

पारंपरिक फ्लर्टिंग में ये माना जाता है कि लड़कों को पहल करनी चाहिए जबकि लड़कियाँ कुछ कम सक्रियता दिखाएँ। ऐसी स्थितियों में अगर दोनों साथी खुश हों तो रिश्ता ज्यादा गहरा बनता है।

कुछ लोग फ्लर्टिंग करते वक्त बहुत संजीदा और चौकस रहते हैं, वो साथी के साथ अच्छे तरीके से पेश आते हैं और अपनी यौन इच्छाओं को दूसरो पर जाहिर करने से बचते हैं वो जल्दी से आगे भी नहीं बढ़ना चाहते। किसके साथ फ्लर्ट करना है उसका चुनाव भी बड़ी सावधानी से करते हैं इतना ही नहीं अपने साथी में दिलचस्पी जाहिर करने में आमतौर पर बहुत ज्यादा समय लेते हैं, औरों से कुछ अलग करना और रिश्तों को अच्छी तरह से बनने देना इनकी ख्वाहिश होती है। फ्लर्टिंग का ये तरीका तीसरी तरह का है जिसे जेफरी ने पोलाइट फ्लर्टिंग की श्रेणी में डाला है।

चौथी श्रेणी के लोग भी कुछ-कुछ पोलाइट फ्लर्टिंग के जैसे ही होते हैं। वो अपने साथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव को सबसे ज्यादा अहमियत देते हैं। इनका बहुत गहराई से ये मानना होता है कि साथी से निजी बातचीत रोमांस को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है और ये लोग फ्लर्टिंग के दौरान बहुत जल्दी कामयाब होते हैं, इन्हें खुद पर भरोसा होता है और बहुत जल्दी किसी रिश्ते की अहमियत को पहचान लेते हैं। ये फ्लर्टिंग का ईमानदार तरीका है।

बहुत सारे लोगों की फ्लर्टिंग स्टाइल प्लेफुल यानी पाँचवी तरह की फ्लर्टिंग में आती है। ये लोग अपने खुद और खुद की सोच को दूसरों पर डालने की कोशिश करते हैं और आमतौर पर बहुत कम ही पक्के और अच्छे रिश्ते बनाने में कामयाब हो पाते हैं। जेफरी मानते हैं कि ज्यादातर मामलों में फ्लर्टिंग की शुरुआत कैसे हुई इसी बात से ये तय हो जाता है कि रिश्ता कहाँ तक जाएगा यहाँ तक कि शादियों के मामले में भी यही होता है।